कभी-कभी ऐसा लगता है कि हम अपनी जिंदगी में सबके लिए जी रहे हैं, लेकिन खुद के लिए हमारे पास बिल्कुल भी समय नहीं बचता।
सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, दिमाग में न जाने कितनी बातें चलती रहती हैं। किसी की उम्मीदें पूरी करनी हैं, किसी को खुश रखना है, किसी की बातों का जवाब देना है और न जाने कितनी जिम्मेदारियां निभानी हैं।
इसी भागदौड़ में हम भूल जाते हैं कि हमारी भी कुछ इच्छाएं हैं, हमारे भी कुछ सपने हैं और हमारा भी मन कभी-कभी सिर्फ सुकून चाहता है।
क्या हम सच में खुश हैं?
कभी अकेले बैठकर खुद से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि क्या हम वही जिंदगी जी रहे हैं जो हम चाहते थे?
हम अक्सर दूसरों की खुशी में अपनी खुशी ढूंढने लगते हैं। किसी को नाराज न कर दें, कोई हमारे बारे में गलत न सोच ले, कोई हमसे दूर न हो जाए… इन छोटी-छोटी बातों के डर में हम अपनी पसंद और अपने फैसलों को पीछे छोड़ देते हैं।
लेकिन एक बात समझने में बहुत समय लग जाता है कि हर किसी को खुश रखना हमारी जिम्मेदारी नहीं है।
खुद के साथ थोड़ा समय बिताना भी जरूरी है
मुझे लगता है कि जिंदगी में कुछ पल ऐसे जरूर होने चाहिए जो सिर्फ हमारे अपने हों।
कभी बिना किसी वजह के अपनी पसंद का गाना सुनना, कभी अकेले चाय पीना, कभी पुरानी यादों को याद करके मुस्कुराना और कभी बिना किसी योजना के बस कुछ देर शांत बैठना।
इन छोटी-छोटी चीजों में भी एक अलग तरह की खुशी छिपी होती है।
हर दिन कुछ बड़ा करना जरूरी नहीं है। कभी-कभी बिना किसी तनाव के एक सामान्य दिन बिताना भी बहुत बड़ी बात होती है।
हर किसी को समझाते-समझाते खुद को मत भूल जाना
हम दूसरों को सलाह देते हैं कि परेशान मत हो, सब ठीक हो जाएगा, खुद का ध्यान रखो।
लेकिन जब बात खुद की आती है तो हम अपनी ही भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं।
हम अपनी थकान छिपाते हैं, अपनी परेशानियां किसी को बताते नहीं और हर बार मुस्कुराकर कहते हैं कि सब ठीक है।
लेकिन सच तो यह है कि हमेशा मजबूत बने रहना भी जरूरी नहीं है। कभी-कभी थक जाना, रो लेना और कुछ समय के लिए खुद को अकेला छोड़ देना भी ठीक है।
एक छोटी सी बात जो याद रखनी चाहिए
जिंदगी बहुत छोटी है। इसे सिर्फ दूसरों की उम्मीदों को पूरा करने में मत बिताइए।
अपने सपनों को समय दीजिए, अपनी पसंद की चीजें कीजिए और उन लोगों के साथ रहिए जिनके सामने आपको कुछ बनने का दिखावा न करना पड़े।
खुद से प्यार करना स्वार्थ नहीं है। यह खुद को समझने और अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने की शुरुआत है।
आज की डायरी की आखिरी बात…
कभी-कभी दुनिया को खुश करने की कोशिश छोड़कर खुद से पूछिए कि “मैं खुश हूं ना?”
क्योंकि जिंदगी में सबसे जरूरी रिश्ता हमारा खुद के साथ होता है।
– मेरी खुली डायरी